नौकरी के पीछे न भागकर रोजगार प्रदाता बन गईं पालमपुर की नि‍शी कटोच, सालाना कमा रहीं आठ लाख

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एक आम गृहणी किस तरह से अपने आप को सुदृढ़ कर सकती है, इसकी मिसाल उपमंडल पालमपुर की नैन पंचायत निवासी निशी ने की है। ग्रामीण महिला ने तीन साल पहले मशरूम की यूनिट लगाने के साथ लगभग एक कनाल भूमि में स्ट्रावरी की खेती शुरू कर खुद को तो मजबूत किया। साथ ही आधा दर्जन ग्रामीणों को रोजगार दिया है। एमए बीएड तक शिक्षा ग्रहण कर चुकी 36 वर्षीय निशी कटोच अब मशरूम की खाद का उत्पादन कर जिला के किसानों सहित बाहरी जिलों की भी मशरूम बैग की आपूर्ति कर रहीं हैं। इसे लोगों को सरकार के तय दामों के अनुसार मुहैया करवाती हैं। उन्होंने शादी के बाद नौकरी को तरजीह न देते हुए रोजगार प्रदाता बनने को प्राथमिकता दी।

निशी कटोच ने बताया कि उनके पति मशरूम के प्लांट में काम करते थेे। उन्हें देखा कि कैसे काम किया जाता है। उन्‍ही सें प्ररेणा लेकर जब वह 2014 में घर वापिस आई तो कृषि विश्वविद्यालय से मशरूम के 10 बैग खरीद कर अपना कार्य शुरू किया व 2018 में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी लिया और उसके बाद 2019 में केंद्र सरकार की एमआईडीएच (एकीकृत बागवानी विकास मिशन) स्कीम के तहत लोन लेकर काम शरू किया।

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निशी कटोच ने कहा छह लोगों को रोजगार भी दिया है व साल की उनकी 8 लाख के करीब आय होती है। बकौल निशी, मशरूम का रोजगार गृहणियों के लिए बहुत अच्छा है और जो महिलाएं घर में वह इस कार्य को कर सकती हैं व सरकार की ऐसी कई योजनाएं हैं, जिनसे उन्हें काफी लाभ होगा। निशी ने कहा कि उन्होंने स्‍ट्रावरी की खेती भी की है, उससे भी काफी अच्छी आय होती है। वहीं यहां पर काम करने वाली पवना देवी और सुरेखा ने कहा यहां पर उन्हें काम मिला हुआ है, जिससे अर्थिकी भी मजबूत हुई है।

उधर, बैजनाथ ब्लाक के विषय विशेषज्ञ उद्यान विभाग डाक्‍टर राजेश शर्मा ने कहा विभाग द्वारा 2018 में पालमपुर की नैन पंचायत निवासी निशी कटोच को पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया और 2019 में केन्द्र की एमआईडीएच (एकीकृत बागवानी विकास मिशन) स्कीम के तहत 22 लाख रुपए से प्रोजेक्ट बनाकर दिया था और विभाग द्वारा उन्हें आठ लाख रुपये की सब्सिडी भी दी गई है। यूनिट से वार्षिक 25 टन मशरूम का उत्पादन हो रहा है। यूनिट का पिछले दो सालों में 25 लाख का टर्नओवर और 6 से 8 लाख रुपये शुद्व लाभ है। उन्होंने कहा केंद्र सरकार की ओर से महिलाओं के सशक्तीकरण और रोजगार के लिए इस तरह की कई योजनाएं चलाई गई हैं।

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