समस्तीपुर : मन्नीपुर भगवती पूरी करती हैं मुरादें, नवरात्र में जुटती है विशेष भीड़

समस्तीपुर :- मनीपुर भगवती स्थान। जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर वारिसरनगर प्रखंड के मन्नीपुर में स्थित है। इस स्थान की महिमा अपरंपार है। इस स्थान की ख्याति दूर-दूर है। कहते हैं यहां आने वालों की हर मुरादें पूरी होती है। कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं जाता है। वैसे तो प्रत्येक दिन यहां सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन नवरात्र में विशेष भीड़ जुटती है। खासकर सप्तमी, अष्ठमी व नवमी को। बड़ी संख्या में महिलाएं मांग खोईंछा भरने पहुंचती हैं।

सौ वर्ष पूर्व हुई थी स्थापना :

आज से तकरीबन सौ वर्ष पूर्व यहां माता की स्थापना हुई। तब एक साधारण सी झोपड़ी थी। उसके बाद एक छोटा सा पक्का मकान बना। बाद में आगे से एक बड़ा द्वार तथा भव्य आकृति बनाई। इस पुराने मंदिर के पीछे एक भव्य मंदिर का निर्माण कर माता को उसमें स्थापित किया गया है। मंदिर की स्थापना के इतिहास के बारे में पुजारी बताते हैं कि इस क्षेत्र में हैजा का भयानक प्रकोप हुआ। बहुत लोग काल कवलित हो गए। एक ग्रामीण को इससे निजात पाने के लिए माता की स्थापना करने का स्वप्न मिला। उसके बाद यहां माता स्थापित हुई और सबकुछ सामान्य हुआ। नए मंदिर के आगे पुराने मंदिर के गर्भगृह वाले जगह माता का चरण बनाया गया है। मंदिर में जाने से पहले श्रद्धालु सिर झुकाते हैं।

बिहार में आस्था का केंद्र :

मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। गर्भगृह में माता की भव्य प्रतिमा है जो बेहद आकर्षक है। मंदिर का त्वरण द्वारा लाल रंग का है। जिसपर मनमोहक आकृतियां बनाई गई है। सामने पूरी तरह प्राकृतिक वातारण है। एक तालाब है। पेड़ पौधे लगे हैं।

फूलों से सजावट :

चैत्र नवरात्र में मंदिर को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। तरह-तरह के फूलों की लड़ियां लगाई जाती हैं। दूर-दूर धूप व धूमन की खुशबू फैलती रहती है। मंदिर के आसपास के क्षेत्र की पूरी तरह साफ-सफाई कराई जाती है। पूरा परिसर चकाचक दिखता है।

जाने का रास्ता :

जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर है यह मंदिर। यहां टेम्पो या रिक्शा के सहारे जाया जा सकता है। स्टेशन पर उतरने के बाद आप रिक्शा के सहारे मथुरापुर घाट तक आ सकते हैं। यहां से दर्जनों ऑटो आपको मिल जाएगी। जिसके सहारे आप मन्नीपुर जा सकते हैं। मुख्य सड़क पर उतरकर वॉ¨कग डिस्टेंस पर यह मंदिर अवस्थित हैं। या फिर बस स्टैंड से भी मथुरापुर घाट आकर वहां जाया जा सकता है।