समस्तीपुर में लंबे समय से जलजमाव, जिले में सब्जी की फसल को नुकसान

पिछले कुछ महीने से नियमित अंतराल पर हो रही बारिश की वजह से जिले में आम-जीची व केला के फसलों का नुकसान तो नहीं हुआ है लेकिन सब्जी की खेती किसानों के लिए अभिशाप साबित हो हो गई है। बाग-बगीचों व खेत में जल-जमाव व बाढ़ की वजह से इस बार किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बार बैगन, नेनुआ, कद्दू, खीरा, मिर्ची, टमाटर, ओल, करैला, कुनरी, परवल, भींडी, बोरा, अरूई, झिगनी, बिन्स सहित अन्य सब्जी की खेती को काफी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग की ओर से सरकार को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में 69803 हेक्टेयर में लगी फसल के प्रभावित होने का उल्लेख सरकारी आंकड़ो में दर्ज है। अत्यधिक बारिश होने और बाढ़ के बढ़ते प्रसार के चलते यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। सब्जी की खेती तरक्की नहीं बल्कि घाटे का सौदा साबित हुआ है। गत जून, जुलाई व अगस्त में इस बार औसत से अधिक बारिश हुई। अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में पानी जमा हो गया और इसके कारण या तो सब्जी के पौधे सूख गए या फिर सब्जी के लिए लगे फूल खत्म होने के कारण इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ा। इससे सब्जी उत्पादक किसानों के बीच काफी परेशानी एवं हताशा हैं।

बारिश की वजह से बर्बाद हो गई सब्जी की फसल

ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर निवासी किसान मदन राय ने बताया कि अन्य वर्ष भी बारिश होती थी लेकिन इस प्रकार से बारिश नहीं होती थी कि फसल ही बर्बाद हो जाए। अभी खेतों में काफी पानी जमा है। इन खेतों में नमी अत्यधिक हो जाने के कारण भी पौधे अथवा लत्तर सूख रहे हैं। राजदेव प्रसाद सिंह, अमरेश सिंह, महेंद्र सिंह कहते हैं कि बारिश से सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है। बारिश से सिर्फ सब्जी की फसल ही नहीं हलक भी सूख चुके हैं। ऐसे में फसल बर्बाद होने से काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

लगभग पांच हजार हेक्टेयर में होती है सब्जी की खेतीजिले के विभिन्न प्रखंडों से मिली सूचना के आधार पर कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में 69803 हेक्टेयर में लगी फसल के प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। जबकि जिले में पांच हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है। सब्जी की खेती के माध्यम से काफी किसान पूरी तरह से आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके हैं।

वास्तविक क्षति का आकलन किया जा रहा.

जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार ने कहा कि फसल क्षति की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। क्षति का वास्तविक आंकलन अभी किया जा रहा है। जिले में बाढ़-बरसात से हुई फसलों की नुकसान की भरपाई आकस्मिक फसल योजना से पूरी की जाएगी। इसके लिए विभाग से अतिरिक्त बीजों की मांग की गई है। कृषि विभाग ने माना है कि जिले के कुछ प्रखंडों में फसलों पर बाढ़ का प्रभाव अधिक हुआ है। वास्तविक क्षति के आकलन को लेकर पानी निकलने का इंतजार किया जा रहा है। इधर, जिला उद्यान पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि जिले में कहीं से भी आम-लीची व केला के बगीचे के नुकसान की सूचना नहीं है।