समस्तीपुर शहर के वायुमंडल में फैले प्रदूषण की होगी जांच, लगाई गई मशीन

समस्तीपुर, [प्रकाश कुमार]। समस्तीपुर शहर के वायुमंडल में फैले प्रदूषण को मापकर उसकी जानकारी अब लोगों को मिल सकेगी। इसके माध्यम से यह पता चल पाएगा कि शहर की आबो-हवा कितनी शुद्ध और प्रदूषित है। इस हवा में सांस लेकर बीमार रहना है या इसके बचाव के लिए कोई उपाय करना है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समाहरणालय परिसर में प्रदूषण मापक के लिए मशीन और डिस्प्ले लगाया है, जो अगले एक सप्ताह के अंदर काम करना शुरु कर देगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में इसका संचालन हो रहा है।

शहरी जीवन में वायु प्रदूषण की स्थिति अक्सर गंभीर हो जाती है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) से इसका मापन किया जाता है और इसके आधार पर ही बचाव के उपाय होते हैं। समाहरणालय परिसर में एंबियंट एयर क्वालिटी मशीन लगाई गई है, जिससे वायु मंडल में फैले हुए प्रदूषण का मापन होने के बाद वह डिस्पले पर नजर आएगा। इससे शहर की एक्यूआइ को ज्यादा सटीक तरीके से मापन करना संभव होगा। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मशीन के लिए समाहरणालय कार्यालय परिसर को चिह्नित कर इसको लगा भी दिया है। मशीन तीन किलोमीटर क्षेत्र में वातावरण में हो रहे बदलाव को प्रदर्शित करती है। बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी कुछ मानकों के आधार पर समय-समय पर वायु प्रदूषण का मापन किया जाता है, लेकिन यह मशीन 24 घंटे मापन करती है और सभी मानकों पर आंकड़ा मुहैया कराती है। जिससे बेहतर तरीके से एक्यूआइ की गणना संभव होती है। इस मशीन से शहर की वायु प्रदूषण की स्थिति का आकलन हो सकेगा तथा इसी आधार पर ही एक्यूआइ तय होगा।

क्या है एंबियंट एयर क्वालिटी मशीन

यह मशीन वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तत्वों की वातावरण में मात्रा का आकलन करती है। महीन धूलकणों (पीएम 2.5 व पीएम 10), सल्फर आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनोआक्साइड समेत अन्य गैसों के स्तर का मापन करती है। यह मशीन हर घंटे आंकड़े भी प्रदर्शित करेगी।

यह होगा फायदा

किसी भी नई औद्योगिक इकाइयों को चालू करने के लिए उद्योगपति को बोर्ड से एनओसी, कंसेंट टू ऑपरेट, ऑथराइजेशन, ऑथराइजेशन अंडर बायोमेडिकल वेस्ट (हॉस्पिटल के लिए) की अनुमति लेनी अनिवार्य है। जिला स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय खुलने से उद्योगपति अब राहत की सांस ली है। इसके अलावा अधिकारियों को भी फायदा हुआ है। एमरजेंसी कंप्लेंड पर जाने के लिए अब अधिकारियों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा रोजमर्रा आने वाले शिकायतों का निपटारा भी समय पर किया जा सकेगा।

प्रदूषण से बढ़ रही बीमारी

प्रदूषण को लेकर जिले के लोग समस्या से जूझ रहे है। घर से ऑफिस पहुंचते ही सिर में दर्द, एलर्जी जैसी समस्याओं से जूझना आम बात हो गई है। फिजीशियन डॉ. आरके कहते हैं कि प्रदूषण के कारण आम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ गई है। प्रतिदिन उनके पास सांस की एलर्जी वाले मरीज पहुंच रहे हैं। प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने से तनाव जैसी समस्या हो रही है। प्रदूषण के कारण वैसे तो सभी उम्र के लोग परेशान हैं। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग व बच्चों को हो रही है।

प्रदूषण से होने वाली परेशानी

प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के शुरुआती लक्षण जैसे नाक में काला जमा होना, चेहरे तथा शरीर का वह भाग जो कपड़े से ढका नहीं हो उसका काला हो जाना, त्वचा का एलर्जी होना, सांस की एलर्जी की शुरूआत यानी बार-बार छींक आना, नाक से पानी आना, आंख लाल हो जाना, आंख से पानी आना, दम फूलना, दमा का अटैक होना आदि है। इसके साथ व्यवहार में परिवर्तन यानी जल्दी गुस्सा आना, तनाव में रहना, अनिद्रा हो जाना आदि परेशानी होती है।

बचाव के लिए क्या करना

  • अपने घर या आसपास पैदल या साइकिल से जाएं। बिना जरूरत वाहन का प्रयोग नहीं करें।
  • पब्लिक परिवहन का प्रयोग यानी ट्रेन या बस का प्रयोग करना, कार पुलिंग कराना यानी एक साथ चार या पांच आदमी कार्यालय या अन्य जगह जाएं।
  • जाम में फंसे हो तो बाइक व चार पहिया को बंद कर देना यानी बिना वजह इंजन चालू न रहे यह ध्यान दें।
  • धुआं उत्पन्न करने वाले ईंधन लकड़ी, कोयला, गोइठा का इस्तेमाल नहीं करना, खेत में भूसा को नहीं जलाना, प्लास्टिक को नहीं जलाना चाहिए।
  • सड़क पर धूल न उड़े इसके लिए पानी का छिड़काव, भवन बनाते समय उसका धूलकण न उड़े इसका बंदोबस्त होना चाहिए। – शहरी इलाके में नगर निगम नाले का कचरा निकालकर सड़क न छोड़ें तुरंत डिस्पोजल होना चाहिए।
  • सप्ताह में एक दिन वाहन का प्रयोग नहीं करे इसके लिए सरकार की ओर से सख्ती होनी चाहिए