समस्तीपुर में दो दिन पूर्व जिसका दाह संस्कार हुआ वह सकुशल लौटा घर

समस्तीपुर। वैनी ओपी क्षेत्र के ठहरा पंचायत के वार्ड संख्या दस में एक आश्चर्यजनक कितु सत्य घटना हुई। 68 वर्षीय रामलगन महतो उर्फ बतहू महतो का अपनी पत्नी से भैंस बेचने को लेकर विवाद हुआ। इस कारण 14 अगस्त को वे घर से निकल निकल गए। उसी दिन शाम को खुदीराम बोस पूसा एवं कर्पूरीग्राम रेलवे स्टेशन के बीच रेल फाटक संख्या 65 के निकट डाउन लाइन के पास एक बुजुर्ग पुरुष का शव पाया गया। वैनी ओपी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए समस्तीपुर ले गई। शव की पहचान नहीं होने के कारण पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार सुरक्षित शव गृह में रखा गया। इसी बीच रामलगन महतो के पुत्र सहित अन्य परिजन शव गृह गए। पुत्र शव को नहीं पहचान पाए लेकिन स्वजनों के द्वारा कहा जाता है कि यह शव रामलगन महतो का ही है। 16 अगस्त को शव गृह से उक्त शव ठहरा गांव में लाया गया। यहां दाह-संस्कार किया गया। रामलगन महतो के मंझले पुत्र ने शव को मुखाग्नि भी दी। इधर, रामलगन की पत्नी चूडी़ सिदूर त्याग कर विधवा वस्त्र पहन ली।

ठहरा पंचायत के मुखिया पति ने दाह संस्कार के लिए पंद्रह सौ रुपये पीड़ित परिवार को दे दी। 18 अगस्त को दोपहर बाद घटना नाटकीय ढंग से बदल जाती है। क्योंकि रामलगन महतो उर्फ बतहू महतो सदेह अपने गांव में आते हैं। यह सूचना फैलते ही वहां लोगों का हुजूम जमा हो जाता है।

घटना के संबंध में पूछे जाने पर रामलगन महतो बताते हैं कि घर में पत्नी से विवाद होने के बाद वह साईकिल से घर से निकल गए। साईकिल चलाते-चलाते बेगूसराय तक चले गए। थकान हो गयी थी। वहीं एक मंदिर के बरामदे पर आराम करने के लिए ठहर गए। वहां के लोगों ने पूछताछ की। उसके बाद लोगों ने ही उसे समस्तीपुर जाने वाली बस में बिठा दिया। समस्तीपुर में बस से उतर कर वह अपने घर आ गए। जिसका दाह संस्कार पुत्र ने कर दिया वह सदेह जीवित अपने घर आ गए। इससे परिवार में एवं समाज में खुशी देखी गई। लेकिन इस घटना से लाख टके का सवाल यह निकल कर आया कि आखिर वह कौन था। जिसका रामलगन के पुत्र ने दाह संस्कार कर दिया। वह शव किसका था जिसे वैनी ओपी पुलिस ने रेलवे लाइन से बरामद कर पोस्टमार्टम कराया।

अज्ञात शव की पहचान कराने को लेकर नियमानुसार 72 घंटे तक पहचान के लिए शव गृह में रखा। इस उलझे सवालों के जबाब जानने की उत्सुकता सबों को है।