समस्तीपुर। प्रलयंकारी बाढ़ की विभिषिका का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। किसानों के सारे अरमान बाढ़ के पानी में बह गए

समस्तीपुर। प्रलयंकारी बाढ़ की विभिषिका का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। किसानों के सारे अरमान बाढ़ के पानी में बह गए। किसानों ने बड़ी उम्मीद से खेतों में फसलें लगाई थी। मक्का, मुंग एवं धान की फसल से खेत लहलहा रहे थे। अपने खेतों को लहलहता देख किसानों का सीना चौड़ा था। लेकिन गंगा और वाया ने किसानों के इन सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। रही-सही कसर लगातार हो रही भारी बारिश ने पूरी कर दी। पहले जहां खेतों में हरियाली थी, वहीं आज यह सफेद चादर की तरह दिख रहा है। बाढ एवं बारिश के पानी में फसलें पूरी तरह डूब चुकी है। गंगा एवं वाया के बाढ़ के कारण दियारा एवं सरैसा की सत्रह पंचायतें पूरी प्रभावित हुई है। मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर और विद्यापतिनगर प्रखंड के कुछ पंचायतों में बाढ ने जबरदस्त कहर बरपाया है।

सरकारी आंकड़ों की बात करे तो पूरे प्रखंड में 5301 हेक्टेयर में खेती की जाती है। जिसमें से 3458 हेक्टेयर में लगी फसल के बर्बाद होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि यह बढकर चार हजार हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। प्रखंड कृषि कार्यालय के द्वारा 11 अगस्त तक के अनुमानित आंकड़े में सिवैसिगपुर पंचायत के 258 हेक्टेयर, राजाजान के 86 हेक्टेयर, मदुदाबाद पंचायत के 75 हेक्टेयर, तेतारपुर के 207, भदैया के 286, कल्याणपुर बस्ती पूर्वी के 107, कल्याणपुर बस्ती पश्चिम पंचायत के 96, मो. नगर उतर के 176, मो. नगर दक्षिण के 129, करीमनगर पंचायत के 154, दुबहा पंचायत के 319, बोचहा के 261, महमदीपुर 184, हरैल 314 , कुरसाहा 158, रासपुर पतसिया पूरब 321, रासपुर पतसिया पश्चिम में 327 हेक्टेयर भूमि में लगी फसल के बर्बाद होने का अनुमान है। बाढ़ के कारण किसानों को करीब 04 करोड़ 66 लाख 83 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। कृषि कार्यालय मोहिउद्दीननगर के द्वारा 11 अगस्त तक के अनुमान पर यह आधारित है। हालांकि यह आंकड़ा बढ सकता है। इसका कारण गंगा एवं वाया में आयी बाढ के कारण बहुत सारे पंचायत बाढ से प्रभावित हुए हैं। प्रखंड कृषि पदाधिकारी मो. साउद आजम रमानी ने बताया कि यह एक अनुमानित आंकड़ा है। जिसमे बदलाव संभव है। दियारा सहित सरैसा के सभी पंचायतों में अनुमान के मुताबकि 10 से 20 प्रतिशत तक फसल क्षति का आंकड़ा बढ सकता है। इस परिस्थिति में कुल क्षति का अनुमान लगभग साढे चार हजार हेक्टेयर तक आसपास होने की संभावना है।

Input- Jagran