समस्तीपुर से आने में लगते थे घंटों, अब चंद घंटों में मुंबई

दरभंगा। आजादी के वर्षों बाद तक दरभंगा तक का सफर काफी कष्टदायक था। समस्तीपुर से छोटी लाइन की ट्रेन से दरभंगा तक 32 किलोमीटर का सफर तय करने में ढाई घंटे का समय लग जाता था। पटना जाने के लिए लोग दो दिनों पहले से ही प्रोग्राम तय करने लगते थे। दिल्ली, मुंबई व बेंगलुरु जैसे शहर आसानी से पहुंच पाना जैसे सपना लगता था। सड़कों की बदहाली के कारण शहर का व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित था। आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर शहर ने विकास की राह पर मीलों तय कर लिया है।

छुक-छुक गाड़ी के बजाय अब अनेकों शहरों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रेनें दौड़ने लगी हैं। फ्लाइट से लोग चंद घंटों में सैकड़ों मील का सफर तय करने लगे हैं। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर बनने के बाद व्यवसाय फलने-फूलने लगा है। सड़क मार्ग से लोग देश के कोने-कोने तक का सफर तय करने लगे हैं। विदेश में रहने वाले लोग भी अपने शहर के विकास के किस्से सुनते नहीं थकते हैं। हालांकि जिले के लिए यह निराशा की बात है कि आजादी के 74 वर्ष बाद भी जिले में उद्योग-धंधे का समुचित विकास नहीं हो पाया। पूर्व से चल रही रैयाम व सकरी चीनी मिल बंद हो गयी। अशोक पेपर मिल का भी वही हाल है। औद्योगिक प्रांगण में भी कई फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, दरभंगा की पहचान मछली का व्यवसाय भी काफी पिछड़ गया है।

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