कोरोना संकट और लॉकडाउन ने कैसे दी बिहार के इस जिले को विकास की नई उम्मीद, पढ़िए खास रिपोर्ट

पटना.कोरोना महामारी में पिछले साल जब लॉकडाउन लगा उसके बाद बिहार का पश्चिम चंपारण जिला सबसे प्रसिद्ध निर्यात के रूप में उभरा है। दरअसल लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों और देशों में काम करने वाले जिले के लगभग 1 लाख कामगार वापस अपने घर लौटे। घर लौटने वाले इन प्रवासी मजदूरों की जिला प्रशासन ने मदद की। जिससे प्रवासी श्रमिकों ने मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप शुरू किया। अब बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से ट्रैक सूट लद्दाख भेजे जाते हैं तो यहां से जैकेट का स्पेन में निर्यात करना शुरू कर दिया है। अब पश्चिम चंपारण जिला परिधान उद्योग केंद्र बनने की राह पर है।

इदरिश अंसारी और अर्चना कुशवाहा शायद अप्रैल 2020 का समय कभी नहीं भूल पाएंगे। ये उन 1 लाख लोगों में शामिल थे जो पिछले साल लॉकडाउन की वजह से भूखे प्यासे पश्चिम चंपारण जिले स्थित अपने गांव लौटे थे। अंसारी ने बिना किसी उम्मीद के दिल्ली और कुशवाहा सूरत छोड़ दिया, यह जानते हुए कि उनके जिले में उनके लिए काम नहीं होगा। दोनों ही कुशल कामगार हैं और बिहार में कम शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण यहां ज्यादा रोजगार नहीं है।

धीरे-धीरे तैयार हो गया 80,000 से अधिक श्रमिकों का डेटाबेस

जब वे लोग पश्चिम चंपारण जिले पहुंचे तो उन्हें दूसरे राज्यों से लौटने वाले प्रवासियों के साथ क्वारंटीन शिविरों में रखा गया। यह एक कठिन समय था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी क्योंकि जिला प्रशासन ने संकट को टालने के लिए तेजी से काम किया। क्वारंटीन के समय ही जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने प्रवासी श्रमिकों की स्किल को पहचाना और उनकी योग्यता के हिसाब से स्किल मैपिंग प्रोग्राम शुरू किया। फिर धीरे-धीरे 80,000 से अधिक श्रमिकों का डेटाबेस तैयार हो गया।

स्टार्टअप के लिए डीएम की पहल पर मिला ऋण
फिर स्टार्टअप शुरू करने की योजना बनाई गई। लेकिन स्टार्टअप का सपना बिना पैसों के पूरा नहीं हो पाता ऐसे में डीएम कुंदन कुमार ने श्रमिकों और बैंकों के बीच बैठक की व्यवस्था की। उन्होंने कहा, ‘आज इन स्टार्टअप्स को करीब 6.5 करोड़ रुपये का ऋण मिला है। लोन ने उन्हें पुराने उत्पादन केंद्रों से बिजली-करघे, कम्प्यूटरीकृत कढ़ाई मशीन, काटने के लिए लेजर और अन्य मशीनरी खरीदने और यहां तक कि समान उपकरण आयात करने में सक्षम बनाया।

आज यहां तैयार हो रहे जींस, शर्ट, साड़ी के साथ अन्य तरह के कपड़े

आज यहां जींस के साथ साड़ी, लैगिंग जैसे कई कपड़े तैयार हो रहे हैं। आईटी पेशेवर नवनीत राज ने बताया कि यहां के माल की बिहार, पूर्वी यूपी और नेपाल के स्थानीय बाजार में काफी डिमांड है। नेपाल के कई व्यापारियों ने रुचि व्यक्त की है। नवनीत की एडीआर शर्ट्स एक महीने में लगभग 5000 शर्ट बनाती हैं। इन्हें गोपालगंज, यूपी और नेपाल से ऑर्डर मिलते हैं। अर्चना कुशवाहार का चंपारण क्रिएशन 16 हजार से ऊपर साड़ी बेच चुका है। वहीं अंसारी 70 हजार के करीब लैगिंग्स बेच चुके हैं।

Input- Atul Thakur