समस्तीपुर-दोनों वक्त का भोजन तो मिल रहा, पर पेयजल और शौचालय को लेकर है पेरशानी

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समस्तीपुर। बाढ के कारण प्रखंड क्षेत्र के सिबैसिगपुर पंचायत अंतर्गत चार वार्डों की करीब पांच हजार आबादी पिछले 11 जुलाई से बांध पर शरण लिए हुए हैं। तटबंध पर पॉलीथिन का आशियाना बनाकर खुद के साथ-साथ मवेशियों के साथ दिन और रात गुजार रहे हैं। बाढ के कारण ये सभी पूरी तरह बेघर हो चुके हैं। इनलोगों को तटबंध पर गुजरवसर करने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है।

दैनिक जागरण की टीम ने बुधवार को इन बाढ़ पीड़ितों की पड़ताल की। झोपड़ी में दिन गुजार रही सुबधी देवी, मीणा देवी, विवेखा देवी, राम नारायण महतो आदि ने बताया कि भगवान ने पहले तो कोरोना के कहर से परेशान किया। अब बाढ का कहर झेल रहे हैं। पिछले 11 दिनों से सपरिवार मवेशी के साथ तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। प्रशासन के सहयोग से खाना तो देर सबेर दोनों वक्त का मिल जाता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या शौचालय एवं पीने के लिए पानी की है। बांध के दोनों तरफ पानी ही पानी है। एक तरफ नदी तो दूसरी तरफ वर्षा के पानी से पूरा गांव जलमग्न है। जिसके कारण खुले में शौच करना संभव नहीं है। पुरुष तो किसी तरह दूर-दराज चले जाते हैं लेकिन महिलाओं को काफी दिक्कतें होती है। बीडीओ, सीओ, मुखिया आदि के द्वारा भोजन का प्रबंध कर सराहनीय कार्य किया गया है। प्रखंड स्तरीय प्रशासन भी अक्सर देखने आते रहते हैं। लेकिन शौचालय एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था नही हो पायी है। इस संबंध में स्थानीय मुखिया दीपक झा ने बताया की बाढ पीड़ितों को सुविधा मुहैया कराने के लिए वे पूरी तरह प्रयासरत हैं। लोगों को समय पर भोजन उपलब्ध हो, इसके लिए प्रखंड प्रशासन के सहयोग से खाना बनाने, तैयार खाना घर- घर पहुंचाने के लिए 70 लोग एवं 5 ट्रैक्टर को लगाया गया है। ताकि लोगों को समय पर भोजन उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी ने 36 स्थानों पर शौचालय, 25 स्थानों पर चापाकल अविलंब गाड़ने का आदेश दिया था। लेकिन 11 दिन में 36 शौचालय की जगह मात्र 13 का निर्माण किया गया है। 25 स्थान पर चापाकल गाड़ने के स्थान पर अब तक 7 स्थानों पर चापाकल गाड़े गए हैं। जिसमें गाड़ने के साथ ही दो खराब हो गया है। बार- बार कहने के बाद भी पीएचईडी के लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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input- Jagran

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