बिहार में अच्‍छी-खासी पैदावार के बाद भी किसान को नहीं हुआ फायदा, 15 रुपये किलो आम,10साल में सबसे कम हुई आय

मौसम की मार ने इस साल आम व्यवसायियों व किसानों को बीमार कर दिया है। आम की फलन अच्छी होने के बाद भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ। कोढ़ में खाज का काम कोरोना वायरस संक्रमण ने कर दिया। लाकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों के व्यापारी नहीं पहुंचे। जो पहुंचे, उन्हें आम का रंग पसंद नहीं आया। सबसे अधिक नुकसान पिछात आम तोडऩे वाले किसानों को हुआ। फजली आम किसानों की तो इस बार कमर ही टूट गई।

एक किसान को 25 लाख का नुकसान

कहलगांव के राजीव चौधरी के तीन गोतिया के पास पांच हजार से अधिक आम के पेड़ हैं। बगीचा में अधिकांश पेड़ फजली आम के हैं। प्रत्येक वर्ष सारे खर्च काटकर 25 से 30 लाख रुपये का फायदा होता था। इनके बगीचे का आम 25 वर्षों से बांग्लादेश, उड़ीसा में विशेष रूप से पसंद किए जाते थे। लेकिन इस बार आम में कालापन आ जाने के कारण कीमत नहीं मिल सकी। 25 से 30 रुपये किलो बिकने वाला आम इस बार 12 से 14 रुपये किलो बिका। बाहर के व्यापारी कम आम ले गए। राजीव चौधरी ने बताया कि इस बार सारे खर्च काटने के बाद एक से डेढ़ लाख रुपये ही मुश्किल से आया।

कोलकाता से नहीं आए व्यापारी

भागलपुर का आम भारी मात्रा में कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य जिलो में जाता है। लेकिन इस बार पश्चित बंगाल से 25 फीसद व्यापारी ही भागलपुर पहुंचे। पीरपैंती के आम के बड़े किसान नवल सिंह का कहना है कि उनके पास 15 एकड़ में आम का बगीचा है। उनके बगीचा का शत-प्रतिशत आम कोलकाता की मंडी में जाता था। लेकिन इस बार 25 फीसद व्यापारी ही पहुंचे। जो व्यापारी पहुंचे, उन्हें आम पसंद नहीं आया। आम में कजली पडऩे के कारण कोलकाता के व्यापारी ने आम की नहीं के बराबर खरीद की। पटना, बोकारो, समस्तीपुर, औरंगबाद के व्यापारी ने कम कीमत पर आम की खरीद की। 45 से 55 रुपये किलो बिकने वाला आम 20 से 25 रुपये किलो आम बिका। इस बार आम का फलन अधिक होने के बावजूद पांच से छह लाख रुपये की ही आमदनी हुई।

दस साल में सबसे कम हुई आय

इस साल की तरह आम किसानों को कभी भी घाटा उठाना नहीं पड़ा था। पीरपैंती के आम किसान वरुण यादव ने बताया कि लगातार बारिश होने कर वजह से आम का कलर काला पड़ गया। इस कारण कोलकाता, रांची, जमशेदपुर के व्यवसायी नहीं पहुंचे। आम को पटना, आरा, बक्सर, मोतिहारी आदि जगहों के व्यापारियों के बीच आम बेचना पड़ा। जो आम हर साल 20 से 28 रुपये तक बिका, वह इस साल दस रुपये किलो में व्यापारी ले गए। पिछले साल 35 से 38 रुपये किलो बिका था। दस एकड़ में बगीचा रहने की वजह से हर साल दो से ढाई हजार कैरेट आम बेचते थे। एक कैरेट में 25 किलो आम आता है। इस साल अधिक आम होने के बाद भी फायदा काफी कम हुआ।

तीन हिस्सा आम को हुआ नुकसान

जून में लगातार बारिश होने और फ्रुट फ्लाई (फल मक्खी) का अधिक प्रकोप होने की वजह से तीन हिस्से आम को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक नुकसान लेट वेरायटी के मालदह, फजली सहित अन्य आमों को हुआ है। आम उत्पादक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी का कहना है। जर्दालु, बंबई सहित शुरूआत में होने वाले आम को कम नुकसान पहुंचा। लेकिन पिछात आम भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश व मक्खी की डंक की वजह से आम को नुकसान पहुंचा है। लगातार बारिश होने की वजह से किसान समय पर आम नहीं तोड़ सके। काफी आम बिना तोड़ ही पककर गिर गया। इससे भी किसानों को नुकसान पहुंचा। इस बार पेड़ में अच्छा फल आने के बाद भी किसानों को कम फायदा हुआ।

आम उत्पादक कंपनी का नहीं मिला फायदा

आम उत्पादकों को फायदा पहुंचाने के लिए पिछले वर्ष अजगैवीनाथ आम उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया था। इससे सौ आम उत्पादकों जोड़ा गया है। कंपनी का रजिस्ट्रेशन होने बाद भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। समूह बनाने के पीछे उद्देश्य था कि किसानों को सरकार हर प्रकार सुविधा मुहैया कराएगी। इस समूह से जुड़े किसानों को सरकार 90 फीसद तक अनुदान देकर हर प्रकार की सुविधा मुहैया कराती। इस योजना के तहत आम के बगीचों में बढ़ोत्तरी होती। फल उत्पादन बढ़ाने में किसानों की मदद होनी थी। किसानों को आम की अधिक कीमत मिलती। राज्य सरकार द्वारा आम किसानों के समूह को प्रोसेसिंग मशीन भी उपलब्ध कराना था। बिक्री के लिए मजबूत कार्ययोजना तैयार होना था। सरकार समूह द्वारा उत्पादित फलों से तैयार प्रोडक्ट की बिक्री भी कराती। समूह से जुड़े किसानों को बेहतर फल उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग व बिक्री में सरकार सहयोग करती। लेकिन यह सब कागज पर रह गया।

लगातार बारिश होने व फल मक्खी के प्रकोप की वजह से आम को नुकसान पहुंचा। बारिश की वजह से फल की साइज बढ़ गई और उसमें कीड़े पड़ गए। – ममता, फल वैज्ञानिक

आम की इस बार अच्छी पैदावार हुई है। बाजार में 35 से 50 रुपये रुपये किलो तक आम बिका है। अभी 70 से 110 रुपये किलो आम बिक रहा है। किसी भी किसान ने अभी तक आम के नुकसान की शिकायत नहीं की है। नुकसान के संबंध में किसानों से बातचीत की जाएगी। – विकास कुमार, सहायक निदेशक उद्यान

Input- Jagran[नवनीत मिश्र]