बिहार में बड़ी संख्या में स्कूलों की जमीन के कागजात गायब, अब साफ्टवेयर से होगी निगरानी

बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों समेत अन्य शिक्षण संस्थानों के लैंड रिकार्ड को डिजिटली सुरक्षित रखा जाएगा। विशेष साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा, जिसके माध्यम से शिक्षण संस्थानों की जमीन की निगरानी रखी जाएगी। जमीन की देखभाल में स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी। यदि जमीन का कोई हिस्सा अतिक्रमण में है तो उसे मुक्त भी कराया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से जो साफ्टवेयर तैयार किया गया है उसमें हर शिक्षण संस्थान के लैंड रिकार्ड को जल्द फीड किया जाएगा।

स्कूलों की जमीन के कागजात गायब

सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्ट में यह तथ्य भी उजागर हुई है कि बड़ी संख्या में स्कूलों की जमीन के कागजात ही नहीं हैं। कई कागजात गायब हैं। कहीं हैं भी तो कहां और किसके पास रखे गए हैं, इसकी जानकारी न तो फिलहाल जिला प्रशासन को है और न ही प्रधानध्यापक या प्रभारी को। 30 फीसद विद्यालयों की जमीन का कुछ न कुछ हिस्सा दबंगों के कब्जे में है जो अतिक्रमणकारी स्वेच्छा से कब्जे वाली जमीन को नहीं लौटाएंगे तो उनके खिलाफ स्थानीय प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई होगी।

इन जिलों में जमीन अवैध कब्जे की चपेट

पटना जिले में 35, नालंदा में 14,नवादा में 24, गया में 12, मधेपुरा में 12 स्कूल, मुंगेर में 9, पूॢणया में 33, लखीसराय में 22, सहरसा में 19, समस्तीपुर में 15, शेखपुरा में 12, सीतामढ़ी में 32, सुपौल में 13, पश्चिम चंपारण में 39, बांका में 12, सारण में 32, गोपालगंज में 11, वैशाली में 54 स्कूल अतिक्रमण की चपेट में हैं।

उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए यही व्यवस्था

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि सभी सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के लैंड रिकार्ड को साफ्टवेयर में संग्रहित किया जाएगा। किस पंचायत में किस विद्यालय की कितनी जमीन है और वो जमीन कब से विद्यालय के अधीन है और कितना एरिया में विद्यालय भवन और कैंपस है। जमीन का खसरा संख्या, म्यूटेशन समेत सभी रिकार्ड को सुरक्षित रखा जाएगा। यही व्यवस्था उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए साफ्टवेयर में होगी।