जुगाड़ की नाव के सहारे बाढ़ प्रभावित,जान जोखिम में डाल कर रहे पानी पार

कोसी-बागमती की रफ्तार पर ब्रेक लगा है। दो दिनों से कोसी-बागमती के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। लेकिन अभी भी दोनों नदियां खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर ही बह रही है। कोसी-बागमती की बाढ़ से कई गांव प्रभावित हैं। कई प्रभावित गांवों में नाव की प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था नहीं की गई है। जान जोखिम में डाल कर रहे पानी पार

चौथम प्रखंड के रोहियार पंचायत स्थित बंगलिया गांव का वार्ड नंबर सात बाढ़ के पानी से पूरी तरह से घिरा हुआ है। लेकिन यहां सरकारी स्तर पर नाव नहीं चलाई जा रही है। स्थानीय लोग जुगाड़ का नाव बनाकर जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावितों के अनुसार उनकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है। जबकि चौथम सीओ भरत भूषण सिंह कहते हैं कि, पानी बढ़ेगा तो नाव की व्यवस्था की जाएगी। अभी घोषित नदी घाटों पर नाव चलाई जा रही है। राजस्व कर्मचारी अगर रिपोर्ट करेंगे, तो संबंधित जगहों पर नावें चलाई जाएगी। बंगलिया में कुछेक जगहों पर घरों के बाहर पानी है। अलौली प्रखंड का भी एक हिस्सा बाढ़ की चपेट में

अलौली प्रखंड का भी एक हिस्सा बाढ़ की चपेट में है। अलौली सीओ प्रदीप कुमार के अनुसार चेराखेरा पंचायत की उत्तरी बोहरवा, दहमा खेरी खुटहा की कारगिल टोला, शहरबन्नी के दो वार्ड और रामपुर अलौली पंचायत की वार्ड आठ बाढ़ से प्रभावित है। सीओ की माने तो अभी 17 नावें चलाई जा रही है। जबकि स्थानीय लोगों में नाव को लेकर असंतोष है। चेराखेरा पंचायत की बोहरवा-नवटोलिया गांव निवासी संतोष साह उर्फ सत्यनारायण साह कहते हैं- कट्टी(कटाव) तेज है। मकान धंस रहा है। कभी भी मकान बाढ़ के पानी में समा जाएगा। यहां के कई लोग मचान बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से नाव नहीं दिया गया है।

कई शौचालय डूब गए हैं। जिसके कारण बाढ़ पीड़ितों को असुविधा उठानी पड़ रही है।

इस संबंध में अलौली सीओ प्रदीप कुमार का कहना है कि अभी तक वैसा पानी नहीं आया है। अगर लोग लिखकर देंगे, तो पीएचईडी विभाग से मिलकर अस्थाई शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। इधर राजद जिलाध्यक्ष कुमार रंजन ‘पप्पू’ ने बाढ़ प्रभावित के बीच समुचित राहत कार्य चलाने की मांग प्रशासन से की है।