आज हैं अमर शहीद अमन की प्रथम पूण्यतिथि,जरा याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए

Advertisement

समस्तीपुर। बलिदानी सपूत अमन को नम आंखों से उसके पहली पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि दे रहा है। गलवान सीमा पर मां भारती की रक्षा की खातिर अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले अमन की यादें आज भी जन मानस के जेहन को झकझोर रही है। जिसके पराक्रम से हिदुस्तान का सीना आज भी गर्व से उंचा है। आज ही के दिन पुत्र की शहादत की खबर 16 जून की मध्य रात्रि अमन के पिता सुधीर सिंह को मोबाइल पर मिली थी। स्वजनों में कोहराम तो दूसरी ओर लोगों का जज्बात उबल रहा था। चीनी सेना से बदले की आग के बीच बच्चे के चेहरे पर अमन, सीने में अगन, यह धरती अमन की, अंबर अमन का, बात अमन के, गंगा की अविरल धारा अमन का। कसम मां भारती की अमन तेरी शहादत नहीं जाएगा बेकार। पार्थिव शरीर आने का पल पल इंतजार के बाद 19 जून की सुबह पूरे सैन्य लाव- लश्कर के साथ तिरंगा मे लिपटा हुआ शहीद अमन ताबूत में बंद हो अपने पैतृक गांव पहुंचा था।

जहां श्रद्धांजलि देने को ले पूर्व से लाखों लोगों की भीड के साथ समाहर्ता शशांक शुभंकर, तत्कालीन मंत्री महेश्वर हजारी, एसपी, विधायक सांसद जिला स्तरीय सभी विभागों के पदाधिकारी शहीद अमन के पिता के कंधों पर हाथ दे पार्थिव शरीर आने का इंतजार कर रहे थे। जहां उसकी शहादत पर मेघों का अलाप, मां व पत्नी का विलाप के बीच फट पड़ा था बादलों का कलेजा। बह चली थी हर लोगों के आंखों से अश्रुधारा लेकिन चेहरे पर गर्व अपने सपूत अमन का मां भारती की रक्षा में प्राण न्योछावर का गर्व भी। भाई-बहन, दोस्त बडे बुजुर्ग अमन की बचपन की यादों में डूबे एक टक से अमन की पार्थिव शरीर देख फफक कर रो रहे थे। चौखट के भीतर आंगन में अचेत में डूबी अमन की पत्नी मीनू निष्प्राण थी। जिसके सामने शून्य को निहारने के सिवाय कुछ भी तो नहीं था। जिसके हाथों में लगी मेहदी के रंग भी फीके नहीं पडे थे। उमड़े जन सैलाव की हर आंखें एक झलक पाने को बेताव था। वहीं कांपते हांथों से पिता सुधीर सिंह श्रद्धांजलि देते वक्त फफक पडे़। वहीं बहन मौसम कुमारी अपने भाई के शव से लिपट कर बोल पडी भाई तेरी राखि रही उधार। आज पुरा इलाका अपने वीर सपूत के पहली पुण्य तिथि पर गौरवान्वित हो नम आंखों से उसे श्रद्धांजलि दे रहा है। जिसके लिए सुलतानपुर उसके पैतृक गांव में व्यापक तैयारी की गई है।

Advertisement
Advertisement