समस्तीपुर- टपकते पानी व टूटकर गिरते छत के नीचे होती है मरीजों की चिकित्सा

समस्तीपुर। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा में सुधार का ढोल पीटने के साथ-साथ बेहतर संरचना और ढांचा का भले ही दावा किया जा रहा हो, लेकिन रोसड़ा स्थित अनुमंडलीय अस्पताल की स्थिति देखते ही सरकार के सारे दावों की हवा निकल जाती है। अनुमंडल के करीब 15 लाख से अधिक लोगों की चिकित्सा का जिम्मा संभाले यह अस्पताल वर्षा से अपने ही इलाज की वाट जोह रहा है। अस्पताल का नया और पुराना दोनों ही भवन का छत जगह-जगह से टूट कर गिरने लगा है। कई बार हादसा होते-होते बचा है। वर्षा के दिनों में छत से टपकते बूंदों के बीच ही मरीजों का इलाज भी किया जाता है। जांच एवं इलाज के लिए लगाए गए करोड़ों की मशीन पर भी वर्षा का पानी टपकने के कारण हमेशा ही उसके खराब होने की आशंका बनी रहती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्लास्टिक से ढ़ककर उसकी सुरक्षा का प्रयास अवश्य किया गया है, लेकिन भारी बारिश में कई कक्ष में पानी का जमाव तक हो जाता है। स्थिति यह है कि प्रसव कक्ष और बच्चा वार्ड के साथ-साथ शल्य चिकित्सा कक्ष में भी बारिश के समय पानी टपकने लगता है। जिससे चिकित्सक व कर्मी को इलाज में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगातार विभाग का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया जा रहा है। वही निरीक्षण को आए विभागीय व वरीय पदाधिकारी भी जांच प्रतिवेदन में इसका जिक्र अवश्य किए हैं। और तो और कई बार निरीक्षण को पहुंचे माननीय द्वारा भी अविलंब इस ओर सुधार का आश्वासन अवश्य दिया गया लेकिन धीरे धीरे स्थिति बद से बदतर ही होती जा रही है। बताते चलें कि पूर्व में अस्पताल के पुराने भवन में ही सभी प्रकार का चिकित्सीय कार्य संपन्न होता था। करीब 15 वर्ष पूर्व जब नई ओपीडी भवन का निर्माण हुआ तो चिकित्सक व कर्मियों में सुरक्षित भवन मैं ड्यूटी निभाने की आश जगी थी। लेकिन निर्माण के बाद पहली बारिश में ही नए भवन में जगह-जगह से पानी का रिसाव होने लगा। घटिया निर्माण के कारण छत की परतें तक उड़ने लगी। आज भी इस भवन में जगह- जगह से रिसाव और बूंदे टपकना जारी है। वही पुराने भवन में अभी भी प्रतिदिन कहीं न कहीं से छ्त का टूट- टूट कर गिरना जारी हैं। चिकित्सक, कर्मी व मरीजों को घायल या हताहत होने की आशंका बनी रहती है। अस्पताल प्रबंधन व प्रशासनिक पदाधिकारी के साथ साथ माननीयों द्वारा भी कई बार इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के बावजूद इस ओर सरकार का ध्यान नहीं देना, स्वास्थ्य के प्रति सरकार के दावो का पोल खोल रहा है।

कोट :

लगातार एक दशक से अस्पताल के भवन की जर्जरता और इसके कारण समस्या के संबंध में विभागीय एवं प्रशासनिक पदाधिकारी के साथ-साथ विभाग को भी पत्राचार किया जा रहा है। बावजूद आज तक इस ओर सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है।

डॉ राणा विश्व विजय प्रताप सिंह उपाधीक्षक, अनुमंडल अस्पताल, रोसड़ा