बिहार: कोरोना काल की आपदा को महिलाओं ने अवसर में बदला, हर दिन 500 से 1000 रुपये तक कर रहीं कमाई

कोरोना काल में देश की अर्थव्यवस्था भले ही संकट में पड़ गई हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों की कई महिलाओं के लिए कोरोना आपदा में अवसर लेकर आया है. बात अगर छपरा की करें तो यहां हजारों महिलाओं के सपने को कोरोना ने पूरा किया है. कोरोना के खिलाफ जंग में मददगार बनी ये महिलाएं मास्क बना कर अपने सपने पूरे कर रही हैं. रिविलगंज प्रखंड के इनई गांव की जीविका दीदी राधिका कुमारी ने बताया कि वे दिन रात काम कर प्रतिदिन एक हजार तक कमाई कर रही हैं.

राधिका घर की मामूली जरूरतों के लिए परेशान रहती थीं, लेकिन कोरोना काल में हुई कमाई से उन्होंने घर के लिए फ्रिज और आवश्यक जरूरी सामान खरीदे. साथ ही बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था भी कर दी. राधिका की तरह इस गांव में सैकड़ों महिलाएं हैं, और पूरे जिले में हजारों महिलाएं हैं जो जीविका के जरिए मास्क बनाकर पंचायतों को सप्लाई कर रही हैं. इनके बनाए मास्क सरकार के मदद से हाथों हाथ बिक जा रहे हैं.

दरअसल, कोरोना के खिलाफ जंग में छपरा की जीविका दीदियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. बिहार में छपरा जिला सबसे अधिक मास्क बनाने वाला जिला बन गया है. जीविका दीदियों द्वारा बनाया गया मास्क विभिन्न पंचायतों के जरिए गांव के लोगों में वितरित हो रहा है. इसके जरिए कोरोना की रोकथाम में काफी मदद मिल रही है.

रिविलगंज प्रखंड के इनई में जीविका दीदियों की एक टोली एक टोली मास्क बनाने में जुटी हुई हैं. जीविका दीदियों का कहना है कि मास्क बनाने के काम के जरिए वे कोरोना को खत्म करने में भी अपना योगदान दे रही हैं. वहीं, इनको घर बैठे रोजगार भी मिल गया है.

रिविलगंज प्रखंड की कार्यक्रम प्रबंधक निभा कुमारी बताती हैं कि कई मेहनती जीविका दीदी प्रतिदिन मास्क बना कर 1000 तक कमा रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इनके मास्क को उचित बाजार मिले इसकी व्यवस्था भी की गई है और पंचायतों में बांटे जाने वाले मास्क जीविका दीदियों के जरिये ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं.