समस्तीपुर पटोरी में वीकेंड लॉकडाउन के पहले दिन सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा

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समस्तीपुर । एसडीएम मो. जफर आलम के आदेश पर वीकेंड के 3 दिनों तक लॉकडाउन के पहले दिन पटोरी बाजार की सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। एसडीओ मो. जफर आलम, बीडीओ डॉ. नवकंज कुमार, सीओ चंदन कुमार एवं थानाध्यक्ष मुकेश कुमार दिन भर वीकेंड लॉकडाउन के अनुपालन में तत्पर रहे। लॉकडाउन के कारण सुबह तथा शाम में कुछ लोग बाजार की सड़कों पर नजर आए परंतु दुकानें बंद होने के कारण उन्हें भी निराश लौटना पड़ा। बीडीओ डॉ नवकंज कुमार ने बताया कि गुरुवार को पटोरी बाजार की सड़कें, सभी सरकारी कार्यालयों, बैंक एवं माइक्रो कंटेनमेंट जोन को सैनिटाइज कराया गया। पुलिस बल एवं फायर ब्रिगेड की टीम ने मिलकर इस कार्य को पूरा कराया। इधर पटोरी में लगातार बढ़ रही संक्रमितों की संख्या को लेकर क्षेत्र के लोगों ने काफी चिता जताई है। गुरुवार को पटोरी में कुल 53 कोरोना पॉजिटिव पाए गए । इनमें 16 लोग एंटीजन टेस्ट में तथा 37 लोग आरटी-पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव मिले हैं। अनुमंडलीय अस्पताल पटोरी के उपाधीक्षक डॉक्टर अमिताभ रंजन ने बताया कि शुक्रवार को भी अनुमंडलीय अस्पताल पटोरी के अलावा चार निर्धारित वैक्सीनेशन सेंटर पर टीकाकरण का कार्यक्रम चलाया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अनुमंडलीय अस्पताल पटोरी के पास पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है। शनिवार को भी वैक्सीनेशन प्रोग्राम जारी रहेगा। उपाधीक्षक ने बताया कि अब अनुमंडलीय अस्पताल पटोरी के अलावा सभी टीकाकरण केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में लोग वैक्सीन लेने पहुंच रहे हैं। कोरोना महामारी में घर पर बैठे मजदूरों को मिले निर्वहन भत्ता : अमित

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पूसा : मजदूर दिवस कोरोना संक्रमण काल के ऐसे समय में आया है, जब न कोई सार्वजनिक आयोजन होगा और ना ही मजदूरों की उपलब्धियों को सराहा जाएगा। बस, मजदूरों के घरों में आर्थिक बदहाली की कुढ़न और चिता की गूंज ही सुनाई देगी। कोरोना महामारी में सबसे अधिक संकट इस समय मजदूरों पर आया है। भाकपा-माले पूसा प्रखंड सचिव अमित कुमार ने मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर दुनिया के मजदूरों को एक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज मजदूरों के हितों पर चर्चा करने के साथ उनके शोषण को रोकने पर चर्चा करने की जरूरत है। बताया कि हर साल एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। मजदूर देश की वह ताकत है जिसके बल पर ही देश की पूरी अर्थव्यवस्था है। सरकार की योजनाओं का लाभ श्रमिकों तक नहीं पहुंच पाता है। क्योंकि अधिकांश श्रमिक कम पढ़े लिखे होते हैं। श्रम विभाग में भी श्रमिकों का पंजीकरण कर औपचारिकता पूर्ण कर ली जाती है। जबकि इस ओर ज्यादा प्रचार प्रसार की आवश्यकता है। भाकपा-माले सचिव ने केन्द्र और राज्य सरकार से इस महामारी में बेरोजगारी से जूझ रहे मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता देने की मांग की ताकि उनका जीवन यापन ठीक ढंग से हो सके। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में बाहर काम रहे मजदूर वापस अपने घर लौट आए है। इससे उनके समक्ष एकाएक भूखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में उन्हें अनाज और नकदी नहीं मिली तो उन्हें खाने के लाले पड़ जाएंगे।

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