समाज के लिए एक अनूठे प्रेम का उदाहरण पति की मौत से शोक में डूबी पत्नी ने भी तोड़ा दम

करनी देखिहो मरनी के बेरिया की उक्ति प्रखंड के कल्याणपुर दक्षिण पंचायत के विशनपुर गांव में शत-प्रतिशत चरित्रार्थ हो गयी। धर्मशास्त्रों में ऐसा मानना है कि जीवन में किए अच्छे कर्म और प्रति-पत्नी के बीच सच्चा प्रेम मरन काल में भी एक दूसरे से अलग नहीं होने देते। इस तरह का सच्चा प्रेम का एक अनोखा उदाहरण बना विशनपुर गांव, जहां करीब 95 वर्षीय पंडित दिवाकांत झा उर्फ भोचन झा का निधन होने के ठीक कुछ ही घंटे के बीच उनकी धर्मपत्नी 90 वर्षीय सुमित्रा देवी को भी निधन हो गया। बताया गया है कि पंडितजी के निधन के बाद उनकी अर्थी संजाकर जैसे ही गंगा तट अयोध्या घाट पहुंची कि घर से उनके पत्नी के निधन की भी सूचना मोबाइल से लोगों को मिली। जिसके बाद लोगों ने पंडितजी का दाह संसकार रोक लोग पुन: घर गये और उनकी पत्नी सुमित्रा देवी का भी पार्थिव शरीर लाकर दोनों की अयोध्याघाट में अगल-बगल में चिंता सजा दाह संसकार किया।

इस अनोखे निधन की कहानी क्षेत्र में सर्वत्र चर्चा का विषय बनी हुई है। वे अपने पीछे पुत्र उमेश झा, पंडित विपिन कुमार झा, गिरीशचन्द्र झा, रमेशचन्द्र झा अधिवक्ता, पुत्री पुनिता देवी, सुनीता देवी सहित नाती-पोतों से भरा 65 सदस्यीय परिवार को छोड़कर इस दुनिया से विदा हुए हैं। इस दंपति के निधन पर अधिवक्ता राजीव कुमार मिश्र, सुनील कुमार सिंह, नृपेंन्द्र ठाकुर, रौशन कुमार मिश्र, अवधेश मिश्र, संजीव मिश्र, रत्नेश्वर ठाकुर, शैलेन्द्र राय, मदन मोहन पाठक, पूर्व मुखिया कपिलेश्वर कुंवर, राम नारायण राय, लक्ष्मणदेव सिंह, नीरज कुमार सिंह, चन्द्रभूषण सिंह आदि ने शोक व्यक्त करते इस दंपति के निधन को समाज के लिए एक अनूठे प्रेम का उदाहरण बताया।