60 की उम्र पार कर चुके लोगों को मनरेगा में नहीं मिलेगा काम, बिहार में सरकार का फैसला

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बिहार में मजदूरों की रोजी-रोटी का सबसे बड़ा साधन मनरेगा ही है। बाहर से लौट रहे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत ही बिहार में काम मिलता है। इस बीच बिहार सरकार ने फैसला लिया है कि अब 60 की उम्र पार कर चुके लोगों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिलेगा। इसे लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने सभी डीएम और जिला कार्यक्रम सम्नवयक को कहा है कि वे मनरेगा के कार्यक्रमों में सख्ती से कोरोना गाइडलाइन का पालन करें।

ग्रामीण विकास विभाग ने 60 साल से अधिक और बीमार लोगों को काम से दूर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं, काम कर रहे मजदूरों को सरकारी खर्च पर मास्क और साबुन उपलब्ध करवाए जाएंगे। विभाग के प्रधान सचिव ने कहा है कि काम के दौरान हमें मजदूरों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना है। सरकार ने कहा है कि हम मजदूरों की सेहत को लेकर गंभीर हैं। कोरोना क्राइसिस के दौरान पिछले साल भी सरकार ने इसे लागू किया था, जिसके परिणाम अच्छे आए थे।

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वहीं, मनरेगा के काम में जीविका दीदियों को भी प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी गई है। 25 मजदूरों की टोली को देखने के लिए एक प्रमुख की तैनाती होगी। इसमें जीविका दीदी ही रहेंगी। इनका काम सिर्फ यह देखना होगा कि मजदूर कोविड गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं कि नहीं। साथ ही काम दौरान एक मजदूर से दूसरे के बीच छह फिट की दूरी होगी। इस दौरान वह मजदूरों को कोरोना के प्रति जागरूक भी करेंगी।

मजदूरों के लिए रहेगी ये व्यवस्था
काम के दौरान कार्य स्थल पर मजदूरों के लिए कई व्यवस्थाएं होंगी। इसमें हाथ धोने के लिए साबुन, हैंशवाश, पानी और मास्क रहेगा। ग्रामीण विकास विभाग ने इसकी जिम्मेदारी पंचायत रोजगार सेवक को दी है। इसके लिए उन्हें अकुशल मजदूर के बराबर भुगतान किया जाएगा।

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ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी ने कहा कि आवास निर्माण को छोड़कर मनरेगा के सभी कामों में इसी तरह की प्रकृति होगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता सूची में जल जीवन हरियाली योजना है। इसके अलावे बाढ़ निरोधी कार्य, जल सरंक्षण और तालाब निर्माण में मजदूर दूरी बनाकर कार्य कर सकते हैं।

Source-NBT

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