जिस मालिक ने लॉकडाउन के बाद बस भेज कर बुलाया था, अब कह रहे हैं-वापस घर चले जाइए

भईया… वहां हालत लगातार खराब होता जा रहा है। जिस फाइव स्टार होटल में काम करता था, वह बंद हो चुका है। सोसाइटियों में काफी रिस्टिक्शन है। किसी भी बाहरी आदमी को आने-जाने की मनाही है। इस बार पगार भी आधा ही मिला। 1 अप्रैल से बिना काम के यंू ही बैठे थे। जिस मालिक ने लॉकडाउन के बाद बस भेज कर बुलवाया था, अब कह रहे हैं कि वापस चले जाइए क्योंकि जिस तरह कोरोना बढ़ रहा है अगले चार-पांच महीने तक कुछ अच्छा नहीं होने वाला है। क्या करते, अब घर जा रहे हैं, वहीं कोई काम शुरू करेंगे, अब पुणे नहीं जाएंगे बिहार में ही रहेंगे। पुणे-दानापुर अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन से आए मधुबनी के मिथिलेश ने अपनी आपबीती इसी अंदाज में सुनाई। कहा- अक्टूबर में ही गए थे। इतनी जल्दी आना पड़ेगा, सोचा नहीं था। साथ में रहे पप्पू ने बताया कि मालिक बोला कि अभी कुछ काम नहीं है, मन है तो जाओ गांव घूम कर आ जाना। जब स्थिति ठीक होगी तो सोचेंगे।

1 अप्रैल से बिना काम बैठे थे, इसबार पगार भी आधी ही दी गई
मधुबनी के अमित पासवान पाटलिपुत्र स्टेशन पर उतरे, बताया कि सहारा के होटल में काम करते हैं। होटल बंद हो गया तो खाने-पीने की समस्या होने लगी। पेमेंट भी नहीं मिल रहा था। किसी तरह 1500 रुपए किराया देकर लौटे हैं। इनके अलावा पालीगंज छोटकी पैपूरा के तेजनारायण, वीर्रा के मुकेश कुमार, इलेक्ट्रीशियन शाहिद आदि काम बंद होने के कारण भारी मन से अपने गांव लौटे हैं। बताया कि पिछली बार काफी समस्या हुई थी। श्रमिक स्पेशल से आने में बहुत परेशानी झेलनी पड़ी थी, इसलिए इस बार जैसे ही मौका मिला आ गए।

सिद्धार्थ कुमार बैग एंड बैगेज और अपनी पूरी फैमिली के साथ आए हैं। पुणे के इंफोसिस में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। बताया कि एक साल से वर्क फ्रॉम होम में घर से ही काम कर रहे थे। इधर जब हालात फिर से बेकाबू हुआ तो, कंपनी से कहा गया कि कम से कम अभी साल भर और वर्क फ्रॉम होम रहकर ही काम करना पड़ेगा, आप गांव जा सकते हैं। ऐसे में लगा कि बेकार के किराया दे रहे हैं, सो पूरे परिवार के साथ अपने घर सहरसा जा रहे हैं। अब सहरसा में ही रहकर कंपनी का काम करेंगे। जब कंपनी फिर पुणे बुलाएगी तो क्या करेंगे, यह पूछे जाने पर कहा कि अभी सोचा नहीं है। उसी ट्रेन से बड़ी संख्या में पुणे के विभिन्न मदरसा में पढ़ने वाले बच्चे भी आए थे। नवेद, सिरमन, नाजिम, फिरदौस, जमाल, करीमुल्लाह समेत 15 बच्चों के एक ग्रुप से बात हुई तो पता चला कि सब कुछ बंद होने के कारण ये बच्चे भी गांव लौट रहे हैं।