समस्तीपुर संकट के समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे राम सकल

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समस्तीपुर । कोरोना काल में जहां लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है। वहीं इस संकट के समय में एंबुलेंस कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अपनी व परिवार की चिता छोड़कर वह दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। सदर अस्पताल में एंबुलेंस में ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले राम सकल राय ने बताया कि वह पिछले पांच साल से कार्य कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण फैलने के बादद से ही उसके लिए नौकरी करना बड़ा चैलेंज है। क्योंकि अस्पताल से एक दिन में कोरोना संक्रमित और कोरोना संदिग्ध चार से पांच शव अंतिम संस्कार के लिए निकलते है। पीपीई किट पहनकर शव को एंबुलेंस के अंदर रखवाना पड़ता है। यह दृश्य हृदय विदारक होता है। सब कुछ सह कर अंतिम संस्कार कराना ही मुख्य उद्देश्य होता है। दुख की घड़ी में हम किसी के काम आ रहे हैं। यही सोच कर अपना फर्ज निभा रहे हैं।

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संकट के समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे राम सकल
समस्तीपुर । कोरोना काल में जहां लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है। वहीं इस

समस्तीपुर । कोरोना काल में जहां लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है। वहीं इस संकट के समय में एंबुलेंस कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अपनी व परिवार की चिता छोड़कर वह दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। सदर अस्पताल में एंबुलेंस में ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले राम सकल राय ने बताया कि वह पिछले पांच साल से कार्य कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण फैलने के बादद से ही उसके लिए नौकरी करना बड़ा चैलेंज है। क्योंकि अस्पताल से एक दिन में कोरोना संक्रमित और कोरोना संदिग्ध चार से पांच शव अंतिम संस्कार के लिए निकलते है। पीपीई किट पहनकर शव को एंबुलेंस के अंदर रखवाना पड़ता है। यह दृश्य हृदय विदारक होता है। सब कुछ सह कर अंतिम संस्कार कराना ही मुख्य उद्देश्य होता है। दुख की घड़ी में हम किसी के काम आ रहे हैं। यही सोच कर अपना फर्ज निभा रहे हैं।

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घर व परिवार को छोड़ कर रहे ड्यूटी :

राम सकल कहते है कि उनका घर पूसा प्रखंड स्थित हरपुर गांव में है। वह समस्तीपुर सदर अस्पताल में ड्यूटी के समय किराया का मकान भी रखे थे। लेकिन कोरोना संक्रमण के फैलते ही उन्होंने घर जाना बंद कर दिया। घर में पत्नी, पुत्र व पुत्री से अलग ही रह रहे है। अप्रैल से लगातार संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। अब अस्पताल परिसर में ही रह रहे है।

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शव को श्मसान पहुंचाने के बाद गाड़ी को करते है सैनिटाइज :

एक दिन में वह पांच-छह शव श्मशान घाट ले जाते हैं। शव ले जाने के पहले पीपीई किट पहनते हैं, और पूरी गाड़ी को सैनिटाइजर कर आधे घंटे तक बंद कर देते हैं। उसके बाद गाड़ी के अंदर बैठते हैं। शव को श्मशान घाट पर उतारने के बाद वापस आने पर पूरे शरीर को सैनिटाइज करते हैं। पीपीई किट उतार उसको डिस्पोज करने के लिए डाल देते हैं।

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