कोरोना की कहर: सरकारी स्कूलों को लेकर शिक्षा विभाग का फैसला, अब एक तिहाई शिक्षक की होगी उपस्थिति

भारत में कोरोना संक्रमण की बेकाबू रफ्तार जारी है. अमेरिका के बाद भारत दुनिया में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित दूसरा देश है. कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है.वहीं बिहार राज्य में मरीजों की संख्या में वद्धि को लेकर बिहार सरकार की टेंशन बढ़ गयी है. कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर बिहार के सभी शिक्षण संस्थान 18 अप्रैल तक बंद किए गए हैं .हालांकि सरकारी स्कूल के शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा था। लेकिन अब सरकार ने शिक्षकों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है.

शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा है कि अब यह निर्णय लिया गया है कि शिक्षक भी अपने विद्यालय में एक तिहाई की संख्या में ही जाएंगे. प्रत्येक शिक्षक बारी-बारी से इसी हिसाब से विद्यालय में उपस्थित रहेंगे. विजय कुमार चौधरी ने बताया कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण सारे शिक्षण संस्थान 18 अप्रैल तक बंद किए गए हैं. सरकार चिंतित है कि विद्यालय कैसे खुले और बच्चे कैसे पढ़ना लिखना शुरू करें. लेकिन कोरोना वायरस कै फैलाव लगातार बढ़ रहा है। आगे भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.

बिहार में बुधवार को जिन 21 लोगों की मौत हुई है, उनमें 11 मृतक पटना के हैं. इनमें सीआईडी के अधिकारी, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और समेत अन्य शामिल हैं. बता दें कि बिहार में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 4786 मामले सामने आए हैं, जिससे वर्तमान में राज्य में एक्टिव कोरोना मरीजों की संख्या 23,724 हो गयी है. पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में कोरोना के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं.

शिक्षा विभाग की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक इस अवधि में प्रिंसिपल और टीचर स्कूल के कार्यालय संबंधी अभिलेखों का निरीक्षण, भेजे जाने वाले प्रतिवेदनों का अपडेट, लेखा-संधारण का लंबित कार्य करेंगे. साथ ही अभी राजस्व विभाग द्वारा भूमि सर्वे का भी कार्य चल रहा है. ऐसी स्थित में वे अपने स्कूल की भू-परिस्थिति संबंधी दस्तावेजों को खोजकर सीओ कार्यालय से उसका सत्यापन कराएंगे. शिक्षा विभाग ने कहा है कि जिन जिलों में अभी सर्वे का काम शुरू नहीं हुआ है. वहां भी अभिलेख आदि प्राप्त कर आगे की तैयारी कर लेंगे.