राज्य में 12 घंटे का बंद या संपूर्ण लॉकडाउन, सर्वदलीय बैठक में कई कड़े निर्णय के संकेत

राज्य में पूर्ण लॉकडाउन लगाया जाएगा या सिर्फ नाइट कर्फ्यू, इसे लेकर सरकार और विपक्ष में फिलहाल मतभेद नजर आ रहा है. कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर अब सियासत भी शुरू हो चुकी है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार को निकम्मा बताया है. वह खुद भी लॉकडाउन के पक्ष में नजर आ रहे हैं. जबकि कुछ अन्य दल सख्त पाबंदियों के पक्ष में हैं. इधर, सरकार में शामिल बीजेपी और जदयू के विधायक तथा कुछ नेता इन दोनों पर विचार कर रहे हैं. इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो दिन पहले कोरोना महामारी को लेकर कड़े फैसले के संकेत भी दे डाले हैं. ऐसे में अब सवाल खड़ा हो रहा है कि शनिवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में एहतियात के तौर पर सिर्फ नाइट कर्फ्यू पर निर्णय लिया जाएगा या फिर पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की जाएगी. लोगों के बीच इस बात को लेकर अभी भी असमंजस बरकरार है.

गुरुवार को प्रदेश में एक ही दिन कोरोना के 6133 नए मरीज पाए गए. यह अभी तक के एक दिन में पाए जाने वाले मरीजों की तुलना में सबसे अधिक है. महामारी के विकराल स्वरूप को देखते हुए आशंका उत्पन्न हो चुकी है कि अब सरकार को मजबूरी में कड़े कदम उठाते हुए पाबंदियों को बढ़ानी न पड़ जाय. जानकारों का मानना है कि सरकार पूर्ण लॉकडाउन नहीं भी तो कम से कम इसके बराबर कड़ी पाबंदियां जरूर लाएगी. विदित रहे कि राज्य में स्कूल_कॉलेज 18 अप्रैल तक के लिए बंद हैं. स्कूलों में 33 फीसदी शिक्षकों की उपस्थिति ही रहेगी. शादी समारोह में 200 लोग शामिल हो सकेंगे. श्राद्ध अनुष्ठान में अधिकतम 50 लोगों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी.

लेकिन अब जबकि इस मामले में हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार को तलब किया है तो अंदेशा है कि इस संख्या में भी सरकार कटौती करेगी. उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि ज्यादे मरीजों वाले जिलों में सरकार नाइट कर्फ्यू लागू करवा दे. शनिवार को होने वाली बैठक में दुकान एवं प्रतिष्ठानों के खुलने के समय में कटौती करते हुए सरकार मॉल तथा शॉपिंग कॉम्प्लैक्स के लिए भी कड़े मानदंड ला सकती है. इसी के साथ बाजारों में होने वाली भीड़ पर नियंत्रण के लिए भी कोई बड़ा फैसला लिए जाने के संकेत मिल रहे हैं. ताकि कोरोना संक्रमण की चेन को किसी तरह से तोड़ा जा सके.