बिहार में एक ऐसी जनप्रतिनिधि, कुर्सी मिलने पर भी नहीं बदली नियत, कपड़ा धोकर वार्ड पार्षद चला रही घर

आज के चकाचौंध दुनिया में कुर्सी मिलते ही पैसे के लिए लोग कुछ भी कर देते है। लेकिन गया शहर के वार्ड संख्या 27 की वार्ड पार्षद आशा देवी एक नजीर है। जो पार्षद की कुर्सी मिलने के बाद भी अपने पुश्तैनी धंधा कर रही है। जिससे घर चल रहा है। पार्षद के साथ पूरा परिवार पुश्तैनी धंधा कपड़ा धोने का काम कर रहा है। वार्ड में साफ-सफाई के कार्य प्रत्येक दिन कराने के बाद समय निकलकर कपड़ा धोना एवं कपड़े को प्रेस कर घर-घर पहुंचे का काम करती है। चुनाव जीतने के पौने चार साल बाद भी पुश्तैनी धंधा को प्राथमिकता दे रही है। लेकिन शहर में कुछ पार्षदों चुनाव जीतने के बाद काफी बदलाव दिखा जा रहा है। पैदल चलने वाले पार्षद दो एवं चार पहिया वाहनों पर चल रहे है। लेकिन आशा देवी जैसे चुनाव जीतने से पहले थी वैसा आज भी है।

आशा देवी वार्ड संख्या 30 के कटारी हिल मोहल्ला में रहती है। जहां एक छोटा सा मकान बना रखी है। वे कहती है कि मेरा मैके भटविगहा मोहल्ला में है तथा ससुराल मानपुर प्रखंड के बंधुआ है। लेकिन काफी दिनों से शहर में रह रही हूं। जहां पति अशोक रजक, पुत्र धमेंद्र रजक, अनुज रजक एवं अनूप रजक के साथ रहती हूं। वार्ड संख्या 30 में घर रहने के बाद भी वार्ड संख्या 27 से चुनाव जीती है। जहां 2017 के चुनाव में कमला देवी को 131 मतों से पराजय कर चुनाव में विजयी मिला था।

40 वर्ष से वार्ड में कर रही है काम

पार्षद आशा देवी का वार्ड संख्या 27 में 40 वर्षो से काम कर रही है। जहां अलीगंज मोहल्ला में कपड़ा प्रेस का करने की दुकान है। जिससे कारण वार्ड के सभी लोग से पहचान है। क्योंकि प्रत्येक घरों को कपड़ा धोने को लेकर घरों में जाती है। वार्ड में कही भी परिचय के लिए मुंहताज नहीं है। चुनाव जीतने से पहले कभी काफी पहचान थी और आज तो कहना ही नहीं।