श्रीबाबू को भारत रत्न देने की मांग, केन्द्र को सिफारिश भेजगी बिहार सरकार, मंत्री विजय चौधरी ने की घोषणा

बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह को भारत रत्न देने की नीतीश सरकार ने मांग की है. इसको लेकर केन्द्र सरकार को अनुशंसा भेजी जाएगी. जिसकी जानकारी विधानपरिषद में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने दी. बीजेपी नेता सचिदानंद सिंह ने श्रीकृष्ण सिंह को भारत रत्न देने की मांग उठायी. जिसपर सरकार का पक्ष रखते हुए शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार इसको लेकर केन्द्र को सिफारिश भेजेगी.

सरकार के इस घोषणा का जल संसाधन मंत्री संजय झा ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि बिहार को बनाने में श्रीबाबू का योगदान अविस्मरणीय है. उनकी कार्यो की जितनी चर्चा की जाए उतना ही कम होगा. बिहार की नींव रखने वालों में श्रीकृष्ण सिंह अग्रणी थे. जैसे ही बिहार अस्तित्व में आया श्रीबाबू ने इसकी कमान संभाली, और उस दौर में बिहार को एक राज्य के रूप में संगठित करने का काम किया.

बता दें कि महान स्वतंत्रता सेनानी “बिहार केसरी” डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) (1887–1961),भारत के अखंड बिहार राज्य के प्रधानमंत्री व प्रथम मुख्यमंत्री (1946–1961) थे. स्वतंत्रता सेनानी व उनके सहयोगी डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह उनके मंत्रिमंडल में उपप्रधानमंत्री, उपमुख्यमंत्री व वित्तमंत्री के रुप में आजीवन साथ रहे. उनके मात्र 10 वर्षों के शासनकाल में बिहार में उद्योग, कृषि, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, कला व सामाजिक क्षेत्र में की उल्लेखनीय कार्य हुये. उनमें आजाद भारत की पहली रिफाइनरी- बरौनी ऑयल रिफाइनरी, आजाद भारत का पहला खाद कारखाना- सिन्दरी व बरौनी रासायनिक खाद कारखाना, एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग कारखाना-भारी उद्योग निगम (एचईसी) हटिया, देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट-सेल बोकारो, बरौनी डेयरी, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड-गढ़हरा, आजादी के बाद गंगोत्री से गंगासागर के बीच प्रथम रेल सह सड़क पुल-राजेंद्र पुल, कोशी प्रोजेक्ट, पुसा व सबौर का एग्रीकल्चर कॉलेज, बिहार, भागलपुर, रांची विश्वविद्यालय इत्यादि जैसे अनगिनत उदाहरण हैं.

उनके शासनकाल में संसद के द्वारा नियुक्त फोर्ड फाउंडेशन के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री श्री एपेल्लवी ने अपनी रिपोर्ट में बिहार को देश का सबसे बेहतर शासित राज्य माना था और बिहार को देश की दूसरी सबसे बेहतर अर्थव्यवस्था बताया था.