समस्तीपुर के 10 गांव में खुलेगी मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशाला

समस्तीपुर, [प्रकाश कुमार]। मिट्टी जांच को लेकर अब जिले में 10 मिनी लैब स्थापित किए जाएंगे। जिससे किसानों को मिट्टी जांच में काफी सुविधा होगी। जिले में सरकारी स्तर पर अब तक मात्र एक मृदा जांच केंद्र है। नए प्रावधान के अनुसार अब किसान स्वयं मिनी लैब स्थापित कर सकेंगे। कृषि विभाग जिले के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम स्तर पर मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशाला स्थापित करने में जुटा है। इसके लिए फिलहाल जिले के 10 किसानों का चयन किया गया है, उन्हें जल्द ही पटना स्थित संयुक्त निदेशक रसायन मिट्टी जांच प्रयोगशाला में चयन पत्र दिया जाएगा। इसके बाद चयनित व्यक्ति मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना कर सकेंगे। उन्हें परियोजना लागत पांच लाख पर विभाग द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। जबकि 25 प्रतिशत अंशदान लाभुक वहन करेंगे।

चयनित किसान को आदेश मिलते ही जांच लैब तैयार करना होगा। इसके लिए ग्लास वेयर, केमिकल, कम्प्यूटर, प्रिंटर आदि का सेटअप तैयार करना होगा। इसके लिए अगल-अलग राशि का बंटवारा किया गया है। लैब तैयार होने की सूचना विभाग को देना होगी, जहां से गठित टीम प्रयोगशाला के मानकों की जांच करेगी। इसके बाद अनुदान की राशि डीबीटीएल के माध्यम से अनुदान की राशि दी जाएगी।

इन गांव में खुलेगा प्रयोगशाला

दलसिंहसराय प्रखंड में पाड़, पूसा प्रखंड में मलिकौर, विद्यापतिनगर में गढ़सिसई, उजियारपुर में चैता, खानपुर में बहुआरा, कल्याणपुर में चांधरपुर, बिथान में चंदौली, वारिशनगर में बेगमपुर और सिंघिया प्रखंड के बंगरहट्टा में दो केंद्र खुलेंगे।

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चयनित स्थल पर लैब स्थापित होने के बाद किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करा सकेंगे। इसके लिए किसानों को पैसे का भुगतान नहीं करना होगा। लैब संचालक द्वारा निशुल्क जांच कर स्वायल हेल्थ कार्ड किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं लैब संचालक को प्रति मिट्टी नमूने के जांच के बाद 180 रुपये की दर से विभागीय स्तर पर भुगतान किए जाने का प्रावधान है।

प्रयोगशाला में होगी मिट्टी की जांच

ग्रामीण स्तर पर खुलने वाली मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशाला में सभी 12 तत्वों की जांच हो सकेगी। प्रयोगशाला में मिट्टी में पाए जाने वाले नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैगभनीशियम, सल्फर, जिक, आयरन, बोरान, मैगभनीज, कॉपर, मालीबेडनम व क्लोरीन की जांच होगी। वैज्ञानिकों की मानें तो मिट्टी की अच्छी सेहत के लिए 16 तत्वों की आवश्यकता होती है। मिट्टी को कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन वातावरण व जल से उपलब्ध होते है, लेकिन शेष पोषक तत्व अन्य स्त्रोत से पूरा करना होता है। ग्रामीण स्तर पर खुलने वाले मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशाला में विभिन्न उपकरणों की आवश्यकता नहीं होगी। यहां किट के माध्यम से खेतों की मिट्टी जांच कर करीब आधे घंटे में किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड उपलब्ध हो सकेगा। जबकि मिट्टी जांच की प्रक्रिया में लैब में चार से पांच दिनों का समय लगता है।

प्रयोगशाला का उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार

सहायक निदेशक रसायन अभिषेक कुमार ने बताया कि गांवों में मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना का उद्देश्य यह है कि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के साथ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का सृजन करना। साथ ही मिट्टी जांच में लगने वाले समय को कम करना और किसानों को उनके द्वार पर मिट्टी जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मिट्टी जांच प्रयोगशाला की स्थापना करने वाले आवेदक के पास स्वयं का निजी भवन अथवा कम से कम चार वर्ष के लिए लीज पर किराए का भवन होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि जिले को मिलने वाले मिट्टी जांच के लक्ष्य को ससमय पूरा करने के लिए मिनी लैब को भी जांच के लिए सेंपल उपलब्ध कराया जाएगा और इसके लिए उन्हें सरकारी दर से भुगतान भी किया जाएगा।