बालिका वधू: कम उम्र में सात फेरे ले रहीं पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल की बेटियां

बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने से लेकर उन्हें अपने मन से जीवनसाथी चुनने तक के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कानून बनाए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। लेकिन भागलपुर समेत पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल के कई जिलों में बालिग होने से पहले ही बेटियों की शादी कर दी जा रही हैं।

चिंता का विषय यह कि संख्या घटने के बजाय लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि भागलपुर में अभी 42.4 प्रतिशत बेटियों की शादी कम उम्र (18 साल से पहले) में कर दी जा रही है। पिछले चार साल में बेटियों की कम्र उम्र में शादी करने की संख्या करीब डेढ़गुना बढ़ी है। एनएफएचएस-5 (2019-20) के सर्वे के अनुसार भागलपुर जिले में 20 से 24 साल की 42.4 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 से कम उम्र में करा दी गयी। जबकि एनएफएचएस-4 (2015-16) में यह आंकड़ा 29.7% ही था। ये आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि सिर्फ चार साल के अंतराल में ही नाबालिग बेटियों की शादी करने का प्रचलन कम होने के बजाय बढ़ गया।

पूर्णिया, कटिहार, बांका में बेटियों की हालत और खराब


पूर्णिया, कटिहार व बांका जिले में होने वाली कुल शादियों में से करीब 50 प्रतिशत बेटियों की शादी 18 साल से पहले कर दी जाती है। पूर्णिया जिले में 51.2 प्रतिशत बेटियों की शादी 18 साल से पहले कर दी जा रही है तो बांका जिले में यह आंकड़ा 49.4 प्रतिशत है। कटिहार जिले में भी 49.4 प्रतिशत, किशनगंज में 36.6 प्रतिशत, मुंगेर में 34.7 प्रतिशत व सहरसा जिले में सर्वाधिक 51.0 प्रतिशत बेटियों की शादी 18 साल से पहले की उम्र में कर दी जाती है।

एनएफएचएस-5 के सर्वे को देखें तो एक तरफ जहां बेटियों की शादी 18 साल से पहले कर दी गयी तो इसका बड़ा दुष्परिणाम यह हुआ कि कच्ची उम्र में मां बनने वाली बेटियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई। एनएफएचएस-4 के सर्वे के दौरान जिले में जहां 15 से 19 साल की 8.2 प्रतिशत महिलाएं मां बन चुकी थीं या फिर गर्भवती थीं तो एनएफएचएस-5 के आंकड़े में यह आंकड़ा बढ़कर 14.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। एनएफएचएस-5 (2019-20) के आंकड़े के अनुसार, बांका जिले में 19.2 प्रतिशत, पूर्णिया जिले में 21.4 प्रतिशत, कटिहार जिले में 16.1 प्रतिशत, किशनगंज जिले में दस प्रतिशत, मुंगेर में 9.6 प्रतिशत और सहरसा में रिकार्ड 23.5 प्रतिशत महिलाएं कच्ची उम्र यानी 15 से 19 साल की उम्र में मां बन गयीं या फिर गर्भवती थीं।

कम उम्र में शादी से मां बनने के दौरान जान का खतरा
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शर्मिला देव कहती हैं कि कम उम्र में शादी करने का प्रचलन बढ़ना चिंताजनक है। कम उम्र में शादी करने से जहां बेटियों का मानसिक विकास अवरुद्ध होता है तो अचानक मां बनने से उसकी व उसके बच्चे की जान को खतरा रहता है। इससे शिशु एवं मातृ मृत्यु दर बढ़ सकती है। कम उम्र में मां बनने वाली महिलाएं जब गर्भावस्था के दौरान रूटीन चेकअप के लिए आती हैं तो कच्ची उम्र में मां बनने का एक डर उनके मन में रहता है, जिससे उनमें तनाव का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है।

फोटो- प्रतीकात्मक