बिहार की बेटी साधना बनी सबसे कम उम्र की पैक्स अध्यक्ष, परिवार का मिला सहयोग

बिहार: 19 वर्ष की उम्र लोगों की खेलने-कूदने और पढ़ाई-लिखाई करने की होती है. इस उम्र में युवा अपने बेहतर भविष्य की तलाश करते हैं. लेकिन इसी 19 वर्ष की उम्र में बिहार के कटिहार जिले की रहने वाली एक बेटी ने कीर्तिमान हासिल किया है. दरअसल 15 फरवरी को हुए पैक्स चुनाव में जिले के मनिहारी अनुमंडल के बौलिया पंचायत के रहने वाली 19 वर्षीय साधना पैक्स चुनाव जीतकर अध्यक्ष बनी हैं.

परिवार का मिला सहयोग

साधना ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 423 मतों से हराया है. साधना के इस जीत पर पंचायत के किसान काफी खुश हैं. बड़ी जीत के 3 दिन बाद साधना किसानों के बीच पहुंच गईं और किसान चौपाल लगाकर किसानों की समस्या को जानने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने किसानों को हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिलाया है. साधना के इस बड़ी जीत में उसके घर परिवार का पूरा सहयोग रहा. सबसे ज्यादा सहयोग उसके पिता अशोक कुमार राय ने की है.

भारी मतों से जीत

पिता से सहयोग मिलना अपेक्षित था. क्योंकि साधना से पहले उनके पिता लगातार 15 वर्ष से बौलिया पंचायत के पैक्स अध्यक्ष थे और पैक्स अध्यक्ष रहने के दौरान साधना उनके काम में हाथ में हाथ बंटाती थी. लेकिन बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य में गिरावट के कारण उन्होंने इस बार चुनाव न लड़कर अपने बेटे सामान साधना को पैक्स चुनाव में खड़ा किया और उसे भारी मतों से जीत हासिल हुई. पांच बहनों में तीसरे स्थान पर साधना बीकॉम की पढ़ाई कर रही है और पढ़ाई के साथ खेती किसानी में भी उसकी रूचि है.

“मेरे प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत पिताजी हैं. पिछले 15 साल से वह बौलिया पंचायत के पैक्स अध्यक्ष थे. जिस कारण थोड़ा बहुत इसकी जानकारी थी और पापा से बहुत कुछ सीखने को मिला. अब पैक्स अध्यक्ष की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है, तो निश्चित रूप से किसानों की समस्या का समाधान और किसानों को मिलने वाली सरकारी योजना का लाभ उन्हें दिलाने का काम करूंगी. अभी बीकॉम फर्स्ट ईयर का पढ़ाई कर रही हूं और आगे पढ़ाई के साथ राजनीति में करियर बनाना चाहती हूं”-


साधना, पैक्स अध्यक्ष

“15 सालों तक बौलिया पंचायत के किसानों की सेवा की. लेकिन बढ़ती उम्र के साथ अस्वस्थ रहने के कारण अपनी पुत्र समान पुत्री साधना को इस चुनाव में खड़ा किया. बोलिया पंचायत के किसान मतदाताओं ने साधना के प्रति बढ़-चढ़कर प्यार दिखाया और भारी मतों से जीत हासिल की. हमारे पैक्स अध्यक्ष रहने के दौरान साधना मेरे काम में हाथ बंटाती थी और बहुत कुछ उसे सीखने को मिला. उम्मीद है साधना किसानों के लिए बेहतर काम करेगी और देश सेवा के साथ समाज सेवा करते हुए अपने घर परिवार का नाम रोशन करें”
अशोक कुमार रॉय, पिता

घर के काम से है लगाव

किसान परिवार में जन्मी साधना को खेती और घर के काम से पूरा लगाव है. घर का किचन संभालने के साथ जानवरों की देख-रेख साधना ही करती है. घर का काम पूरा करने के बाद साधना स्कूटी से अपने कॉलेज जाकर पढ़ाई भी पूरी करती है.