सब्जी उत्पादन में देश में दूसरे नंबर पर बिहार

नालंदा उद्यान महाविद्यालय नूरसराय में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल सब्जी फसल का नर्सरी प्रबंधन सह उन्नत खेती विषय पर छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुक्रवार को हुआ। इसमें जिलेभर के 50 किसान शामिल हैं। प्राचार्य डॉ. पंचम कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 2018-19 में देश का कुल सब्जी उत्पादन में बिहार की नौ फीसदी हिस्सेदारी रही। आज देश में बिहार सब्जी उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। देश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन सब्जी की उपलब्धता 300 ग्राम होनी चाहिए। लेकिन, मात्र 240 ग्राम ही सब्जियां प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्ध हो पा रही है।

सब्जियों की खेती पर सबसे ज्यादा असर जलवायु परिवर्तन का पड़ता है। इसका नतीजा है कि असामयिक अधिक बरसात और अधिक ठंड के कारण सब्जियों की खेती की लागत बढ़ने के साथ ही सब्जियां जल्दी खराब भी होती हैं। ऐसे में जरूरत है जलवायु परिवर्तन के अनुकूल सब्जी की गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने की। मौके पर डॉ. महेश कुमार, डॉ. मणिकांत प्रभाकर, डॉ. संजय कुमार, डॉ. दिलीप कुमार महतो, शशिकांत, डॉ. विनय कुमार व अन्य ने किसानों को प्रशिक्षित किया।

सब्जी उत्पादन में असीम संभावनाएं:

सरकार व वैज्ञानिकों की लगातर कोशिश जारी है। वे नई उत्तम व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए पुष्ट बीज व नए तरीकों का इजाद कर रहे हैं। लेकिन, इसे धरातल पर उतारने में तकनीक का बहुत बड़ा योगदान है। तकनीके के माध्यम से ही हम लागत को कम कर सकते हैं। बेशक मजदूरी एक समस्या बनती जा रही है। खेतों में काम करने के लिए पर्याप्त मजदूर नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में खेतों से फसलों को खाली करन में समय भी जाया होता है। इसका एकमात्र उपाय यंत्रीकरण ही है। इससे कम समय में हम अधिक काम कर सकते हैं। बिहार में सब्जी उत्पादन क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं हैं। दूर दराज के कई गांवों में तो सब्जी की उत्पादकता है। लेकिन, ढुलाई व बाजार की व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां के किसान सब्जी उत्पादन में रुची नहीं लेते हैं। इसके लिए एक बाजार व स्थानीय स्तर पर भंडारण की व्यवस्था पर फोकस करना होगा।