कैंसर को पछाड़, जीती जिदगी की जंग,खुद से हार गए तो जीत नहीं मिलेगी

जिदगी अच्छी चल रही थी। अचानक एक दिन खाना खाने के दौरान गाल व मुंह में तेज जलन का अहसास हुआ। गुस्सा हो पत्नी को खाने में कम मिर्ची डालने की बात कही। इसके बाद हर वक्त के खाने के साथ जलन बढ़ने लगा। बिना मिर्ची का खाना भी तीखा लगने लगा। इस स्थिति में चिता हुई।

बात हो रही है मलयपुर तोमर टोला निवासी राजकुमार सिंह की। राजकुमार सिंह ने कैंसर को पछाड़ कर जिदगी की जंग जीत ली है। लगभग तीन वर्ष का कष्ट इनकी मानसिक मजबूती को कमजोर नहीं कर सकी। अब इनकी दिनचर्या सामान्य है। सुबह उठकर गाय के नाद में सानी लगाने से लेकर व्यापार की भाग-दौड़ व पारिवारिक दायित्व का निर्वाहन कर रहे हैं। ये कैंसर से पीड़ित अन्य मरीजों के लिए प्रेरणा बने हैं कि चुनौती और बड़े से बड़े रोग को मानसिक मजबूती और सही समय पर सही इलाज से ठीक किया जा सकता है। जीवन का अर्थ मुसीबत में रुकना नहीं बल्कि जीवन पथ की चुनौतियों से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ते रहना है।

राजकुमार सिंह ने बताया कि वे सिगरेट और गुटखा का सेवन करते थे। जब लगातार मुंह व गला में जलन का अहसास होने लगा तो पटना में चिकित्सक से परामर्श लिया। कैंसर की तीन बार की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। पर इन्हें चैन नहीं मिला। दिल्ली निकल गए, लेकिन यहां भी रिपोर्ट निगेटिव ही आई। इसके बाद कई लोगों ने कई तरह की सलाह दी। पर राजकुमार सिंह चेन्नई के भेलोर गए। भेलोर में हुई जांच में पहली बार मुंह के कैंसर का पता चला। कैंसर थर्ड स्टेज में होने की बात बताई गई। राजकुमार ने बताया कि रिपोर्ट देखने के बाद वे डर गए। पुरानी बातें याद आने लगी जब लोग सिगरेट और गुटखा खाने से मना करते थे। उन्होंने बताया कि लगभग एक घंटे तक के लिए वे गुम हो गए। इसके बाद सोचा कि अब जो होगा देखा जाएगा। इलाज शुरू कराया जाए। इस समय में रिश्तेदार व परिवारवालों ने बहुत हिम्मत दिलाया। कहा जो हो गया, वह हो गया। उपर वाला सब ठीक करेगा। हिम्मत मिलने से मानसिक मजबूती मिली फिर इलाज का सिलसिला शुरू हो गया। इलाज के दौरान दर्द और कष्ट को अपनों का स्नेह और विश्वास का मलहम मिलता रहा। बात करने के दौरान राजकुमार सिंह भावुक होकर रेडिएशन प्रक्रिया का जिक्र करते हुए बताया कि उस वक्त अजीब सा लगता था। गले से लेकर मुंह तक जालीनुमा कुछ पहना कर सभी स्टॉफ निकल जाते थे। इतना कहने के साथ ही वे कुछ देर के लिए रूके। फिर सिर छटक कर उन्होंने जोश से कहा कि आत्मबल के सहारे हर जंग से मुकाबला किया जा सकता है।