लेटलतीफी:रूट अर्निंग रिपोर्ट के पेंच में फंसा है 86 किमी लंबी मुक्तापुर-लोहना रेललाइन का सर्वे कार्य

रूट अर्निंग रिपोर्ट के पेंच में फंस गया है मुक्तापुर-लोहनारोड नई रेल लाइन का सर्वे कार्य। आज जनवरी माह के खत्म हो जाने के बाद भी इस सर्वे की फाइनल रिपोर्ट रेलवे बोर्ड में समर्पित नहीं होने से इस योजना काे आगामी वित्तीय वर्ष में भी बजट में शामिल होने की उम्मीद कम है। 86 किलोमीटर नई रेल लाइन बनाने से समस्तीपुर के अलावा दरभंगा व मधुबनी जिले के लोगों को लाभ मिलता।

यहां बता दें कि करीब दो वर्ष पूर्व रेलवे के निर्माण विभाग ने करीब 12 सौ करोड़ रुपए के खर्च का सर्वे रिपोर्ट सौंपी थी। बाद में इस कार्य को रेलवे की कंसल्टेंसी इलाइट (रूड़की) को सौंप दी गई। रेलवे सूत्रों ने बताया कि रेलवे की कंसल्टेंसी इलाइट ने भी सर्वे का कार्य कर लिया है।

लेकिन रूट अर्निंग रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण सर्वे रिपोर्ट दाेबारा रेलवे बोर्ड को सौंपा नहीं जा सकता है। रेलवे के मुख्य सूचना पदाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि उत्तर बिहार में डेढ़ दर्जन से अधिक रूट पर सर्वे का कार्य चल रहा है। आरओआर रिपोर्ट बनाने के कार्य में रेलवे की टीम काम कर रही है।

11 रेल स्टेशन बनाने का है प्रस्ताव


मुक्तापुर-लोहनारोड रेल खंड पर 11 रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इसमें मुक्तापुर के अलावा खरारी, सहसराम, बहेड़ी, तिनमुहानिरोड, बिरौल, पाली, अलीनगर रोड, कुरसम, खतबार व लोहना रोड स्टेशन होंगे। प्रस्तावित सभी स्टेशन आबादी के आसपास रखे गए हैं।

सिर्फ अलीनगर रोड स्टेशन अलीनगर बाजार से दो किमी दूर बनाया गया है। इस रेल लाइन से समस्तीपुर के वारिसनगर व खानपुर प्रखंड के लोगों को तो लाभ मिलेगा ही, इसके अलावा दरभंगा के बहेड़ी, बिरौल, अलीनगर प्रखंडों को आवागमन की सुविधा मिलेगी।

योजना पर करीब 12 सौ करोड़ रुपए खर्च होने का है अनुमान

आरइटी सर्वे का कार्य हो चुका है। रूट चार्ट भी फाइनल हो गया है। योजना पर हाेने वाली खर्च का आकलन भी कर लिया गया है। पूरी योजना पर करीब 12 सौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह राशि बढ़ सकती है। अब रूट अर्निंग रिपोर्ट बननी शेष है। रिपोर्ट पर मुख्यालय की स्वीकृति मिली तो योजना सरकार के बजट में शामिल होगा।

लोकसभा में कई बार उठ चुका है मुक्तापुर-लोहनारोड का मुद्दा : मुक्तापुर- लोहनारोड नई रेल लाइन बनाने का मुद्दा कई बार लोकसभा में दरभंगा, समस्तीपुर व मधुबनी के सांसद उठा चुके हैं। सांसदों का मानना था कि यह रेल लाइन जिस इलाके से गुजरेगी वह यह मिथिलांचल का सबसे पिछड़ा भू-भाग है। वर्षों तक यह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र रहा है।